1 वोट की कीमत तुम क्या जानो... ड्राइवर वोट डालने नहीं गया और चुनाव हार गए नेताजी

1 वोट की कीमत तुम क्या जानो… ड्राइवर वोट डालने नहीं गया और चुनाव हार गए नेताजी


Lok Sabha Election 2024: अगली बार जब आप वोट देने जाने में आलस करें या कोई कहे कि आप वोट नहीं डालेंगे तो कौन सा सरकार बदल जाएगी या कोई कहे कि क्या आपका वोट नहीं मिलेगा तो कैंडिडेट नहीं जीतेगा तो आप उसे जरूर बताना कि हां, एक वोट से नेता चुनाव हार सकते हैं. यह लोकतंत्र का उत्सव है और अगर 7-8 वोट से चुनाव में हार जीत का फैसला होता है तो समझिए एक वोट की क्या कीमत है.

Lost Election by One Vote: ‘एक चुटकी सिंदूर की कीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू…’ शाहरुख खान की फिल्म का यह डायलॉग तो आपको याद ही होगा. चुनाव का मौसम है और हम इस डायलॉग में सिंदूर की जगह वोट कर देते हैं. अब बताइए क्या आप एक वोट की कीमत जानते हैं? ना ना ज्यादा सोचिए मत. इसका मोल रुपये पैसे से भी कहीं ज्यादा है. जी हां, एक वोट सांसद या विधायक बनाने की पावर रखता है. यह कोई जुमला नहीं बल्कि हकीकत है. अपने देश में एक वोट से चुनाव जीते गए हैं. लोकसभा चुनाव में हार-जीत के बारीक अंतर को जानने से पहले विधानसभा चुनाव के ही हैरान करने वाले आंकड़े देख लीजिए.

जब एक वोट से मिली जीत

जी हां, दो बार ऐसा हुआ जब एक वोट के अंतर से नेताजी विधानसभा नहीं पहुंच पाए. पहला वाकया 2004 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय का है. जेडीएस के उम्मीदवार एआर कृष्णमूर्ति कांग्रेस के ध्रुवनारायण से सिर्फ एक वोट से हार गए थे. कृष्णमूर्ति को 40,751 वोट मिले थे जबकि ध्रुवनारायण को एक वोट ज्यादा यानी 40,752 वोट मिले. बाद में पता चला कि कृष्णमूर्ति का ड्राइवर वोट देना चाहता था लेकिन जा नहीं सका क्योंकि नेताजी ने उसे चुनाव वाले दिन काम से छुट्टी ही नहीं दी. सोचिए बाद में वह हाथ मलते रह गए होंगे.

दूसरा वाकया

2008 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव हो रहे थे. नाथद्वारा सीट पर कांग्रेस के सीपी जोशी और भाजपा के कल्याण सिंह चौहान मैदान में थे. नतीजे आए तो चौहान को 62,216 वोट मिले जबकि जोशी को एक वोट कम यानी 62,215 वोट मिले. सोचिए हारने वाले कैंडिडेट को एक वोट का कितना मलाल रहा होगा.

जोशी के लिए बड़ा झटका था क्योंकि वह राजस्थान कांग्रेस के न सिर्फ अध्यक्ष थे बल्कि सीएम पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे. उन्होंने पार्टी को तो जिता दिया लेकिन खुद एक वोट से हार गए. इसके आगे दिलचस्प मामला सामने आया. जोशी कोर्ट पहुंच गए और उन्होंने आरोप लगाया कि चौहान की पत्नी ने दो पोलिंग बूथों पर वोट डाला था. हाई कोर्ट ने जोशी के पक्ष में फैसला दिया लेकिन आखिर में वह सुप्रीम कोर्ट में केस हार गए.

काश! परिवार वोट डालने चला जाता

बाद में एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सीपी जोशी की मां, बहन और ड्राइवर ने वोट नहीं डाला था. ऐसे में आप एक वोट की कीमत तो समझ ही गए होंगे. अब लोकसभा चुनावों में जीत के महीन अंतर को देख लीजिए. कभी कोई 9 वोट से सांसद बन गया तो कभी 17 या 26 वोट से. जिस दिन आपके यहां वोट पड़े, आप वोट देने जरूर जाइएगा. (फोटो- चुनाव आयोग के ट्विटर हैंडल से)

 
साल प्रत्याशी लोकसभा सीट राज्य पार्टी जीत का अंतर
1962 रिशंग आउटर मणिपुर मणिपुर सोशलिस्ट 42
1967 एम राम करनाल हरियाणा कांग्रेस 203
1971 एमएस शिवसामी त्रिचेंदूर तमिलनाडु डीएमके 26
1977 देसाई बलवंतराव कोल्हापुर महाराष्ट्र पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी 165
1980 रामायण राय देवरिया यूपी कांग्रेस (आई) 77
1984 मेवा सिंह लुधियाना पंजाब शिरोमणि अकाली दल 140
1989 रामाकृष्ण  अनाकापल्ली आंध्र प्रदेश कांग्रेस 9
1991 राम अवध अकबरपुर यूपी जनता दल 156
1996 सत्यजीत सिंह बड़ौदा गुजरात कांग्रेस 17
1998 सोम मरांडी राजमहल बिहार बीजेपी 9
1999 प्यारे लाल घाटमपुर यूपी बसपा 105
2004 पूकूनी कोय लक्षद्वीप लक्षद्वीप जेडीयू 71
2009 नमो नारायण टोंक सवाई माधोपुर राजस्थान कांग्रेस 317
2014 थूपस्तान चेवांग लद्दाख जम्मू-कश्मीर भाजपा 36

सबसे कम जीत के अंतर वाले लोकसभा चुनाव

 


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